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बुखार QNA

बुखार

बुखार होने को सामान्‍य माना जाता है और बदलते मौसम में तो इसे अनिवार्य भी माना जाने लगा है। लेकिन बुखार होना कहां तक सही है, बुखार किन कारणों से होता है, यह शरीर को कितना प्रभावित करता है, बुखार का उपचार क्‍या है, आदि सवालों के जवाब आपको यहां मिलेंगे। आपके मन में बुखार संबंधित कोई सवाल है तो यहां पूछ सकते हैं।

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Health and lifestyle Related Question on बुखार

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  • Question asked by Rajesh Kumar
     
     
    Answered by Team OMH
    • Team OMH

      December 7, 2016 View All Answers (1)
    • A. इस समस्या के निदान के लिए आप किसी अच्छे डॉक्टर से संपर्क करें।

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  • Question asked by Nilesh Ostwal
     
     
    Answered by Team OMH
    • Team OMH

      November 25, 2016 View All Answers (1)
    • A. डेंगू का प्राकोप आजकल बहुत तेजी से फैल रहा है। यह बीमारी एडीज मच्छर द्वारा काटने से होती है। डेंगू के बारे में सबसे खास बात यह है कि इसके मच्छर दिन के समय काटते हैं तथा यह मच्छर साफ पानी में पनपते हैं। डेंगू के उपचार के लिए पपीते की पत्तियों का ताजा जूस निकाल कर एक-एक चम्मच करके रोगी को दें। पपीते का पेड़ आसानी से मिल जाता है। बकरी का दूध बहुत से लोगों को भले ही पसंद न हो लेकिन इसके फायदे बहुत हैं। डेंगू बुखार के लिए बकरी का दूध एक और बहुत ही प्रभावशाली दवा है। बकरी के दूध में गिरते हुए प्‍लेटलेट्स को तुरंत बढ़ाने की क्षमता होती है। गिलोय की बेल का सत्व मरीज को दिन में 2-3 बार दें, या गिलोय के 7-8 पत्‍तों को लेकर कुचल लें उसमें 4-5 तुलसी की पत्तियां लेकर एक गिलास पानी में मिला कर उबालकर काढा बना लीजिए और इसमें पपीता के 3-4 पत्तों का रस मिला कर लेने दिन में तीन चार लेने से रोगी को प्लेटलेट की मात्रा में तेजी से इजाफा होता है।

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  • Question asked by R.Priya
  • Question asked by Narendra NB
     
     
    Answered by Rahul Sharma
    • Rahul Sharma

      November 22, 2016 View All Answers (2)
    • A. टायफाइड के बाद सरदर्द रहना एक सामान्य समस्या है। इस समस्या से निपटने के लिए तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल करें। तुलसी और सूर्यमुखी के पत्तों का रस पीने से भी टायफायड बुखार ठीक होते हैं। करीब तीन दिन तक सुबह-सुबह इसका प्रयोग करें।

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  • Question asked by Pawan Kumar Singh
  • Question asked by Chandrashekhar Sharma
     
     
    Answered by Abhinav
    • Abhinav

      September 20, 2016 View All Answers (1)
    • A. चिकन पाक्स में शरीर में बहुत तेज खुजली होती है। खुजली से बचने के लिए जई के आटे को पानी में मिलाकर स्नान करना चाहिए। 2 लीटर पानी में 2 कप जई का आटा मिलाकर लगभग 15 मिनट तक उबालें, पके आटे को एक कॉटन के बैग में अच्छी तरह से बांधकर बॉथ टब में डालकर बच्चे को नहलाएं।आधा कप भूरे सिरके को पानी में डालकर नहाने से शरीर में हो रही खुजली से निजात पायी जा सकती है। नींबू का रस पीने से चिकन पाक्स में राहत मिलती है। सब्जी का जूस और अन्य फलों का जूस भी इसमें राहत देता है।नीम की पत्तियों को गर्म पानी में डालकर नहाने से खुजली समाप्त‍ होती है।आधा चम्मच बेकिंग सोडा को एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर पूरे शरीर पर लगाइए, लेप को सूखने दीजिए। इससे चिकनपॉक्‍स जल्‍द ठीक हो जाता है।आधा कप सेब के सिरके को हल्के गर्म पानी में मिलाकर नहाने से राहत मिलती है।

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  • Question asked by Mintu Rai
  • Question asked by DHARMENDRA SINGH
  • Question asked by RAGHVENDRA GOEL
     
     
    Answered by Team OMH
  • Question asked by सुक्रीति
     
     
    Answered by admin
    • admin

      May 11, 2016 View All Answers (1)
    • A.

      पीला ज्‍वर को पीत ज्‍वर भी कहते हैं, यह बहुत ही भयानक रोग है।पीला बुखार भी डेंगू, मलेरिया की तरह एक वायरल संक्रमण है। यह स्‍टैगोमिया नामक मच्‍छर के काटने से मनुष्य के शरीर में फैलता है। ये मच्छर दिन के समय काटता है। आमतौर पर इसमें पीलिया के लक्षण भी पाए जाते है। इसमें त्वचा का रंग पीला और आंखों में पीलापन दिखाई पड़ने लगता है। पीला ज्वर आरएनए वायरस से फैलता है। यह एक सं‍क्रमित रोग है। इस रोग को पैदा करने वाले मच्‍छर बंदरगाहों और जहाज के आसपास पैदा होते हैं इसलिए इनको बंदर-मच्‍छर भी कहा जाता है। यह सिस्टमिक रोग है अर्थात यह पूरे शरीर को प्रभावित करता है। पीले बुखार आमतौर पर तीन से छह दिन के बीच अचानक बढ़ने लगता है। इस पीले बुखार के दौरान अधिकांश मामलों में बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, पीठ दर्द, भूख,मितली और उल्टी आदि होने लगती है। इसका संक्रमण सामान्यतः तीन से चार दिन तक रहता है।

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  • Question asked by Ashish Jha
     
     
    Answered by Rahul Sharma
    • Rahul Sharma

      January 14, 2016 View All Answers (1)
    • A.

      कैंब्रिज यूनिवर्सिटि के एक नए अध्ययन से पता चला है कि मैन फ्लू वाकई में एक सच है और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पुरुष महिलाओं की तुलना में कमजोर लिंग होते हैं। डेली एक्सप्रेस की खबर के अनुसार वैज्ञानिकों ने बताया कि, साहसिक कामों में ज्यादा लगे होने के कारण महिलाओं की तुलना में पुरुषों में इंफेक्शन के खतरे अधिक होते हैं।

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  • Question asked by Rahul Kumar
     
     
    Answered by Geeta Srivastava
    • Geeta Srivastava

      October 28, 2015 View All Answers (1)
    • A.

      फ्लू शॉट, आपको फ्लू के संक्रमण से बचाता है। हालांकि ये सौ प्रतिशत सटीक सुरक्षा की गारंटी नहीं देता, लेकिन फिर भी यह यह फ्लू से बचाव का एक बेहतर विकल्प है। खासतौर पर इस साल आने वाला फ्लू शॉट H1N1 फ्लू वायरस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ दो अन्य इन्फ्लूएंजा वायरसों (जिनके इस फ्लू सीज़न में फैलने की आशंका है) से भी सुरित रखेगा। फ्लू शॉट इन्फ्लूएंजा और इसकी जटिलताओं को रोकने के लिए सबसे प्रभावी तरीका है। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार 6 महिने के बाद की उम्र के सभी लोगों को इन्फ्लूएंजा से बचाव का टीका लगाया जाना चाहिये।

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  • Question asked by Akash Rastogi
     
     
    Answered by Rahul Sharma
    • Rahul Sharma

      October 28, 2015 View All Answers (1)
    • A.

      नए फ्लू के टीके से हर साल जारी किये जाते हैं ताकि तेजी से फ्लू के वायरस के अनुकूल इसे ढ़ाला जा सके। क्योंकि फ्लू वायरस बहुत जल्दी विकसित होता है, पिछले साल के टीके इस साल के वायरस से बचाने में सक्षम नहीं हो सकते हैं। वेक्सिनेशन के बाद अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली एंटीबॉडी का उत्पादन करते हैं, जोकि वैक्सीन वायरस से रक्षा करते हैं। साधाणतः समय के साथ एंटीबॉडी के स्तर में समय के साथ गिरावट शुरू हो जाती है, और यह भी हर साल फ्लू शॉट लेने का एक वाजिब कारण है।

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  • Question asked by reena tiwari
     
     
    Answered by vamdev tiwari
    • vamdev tiwari

      July 26, 2013 View All Answers (2)
    • A. अगर आपको हल्का बुखार होता है तो दवा लेने से उतर जाता है। लेकिन यदि बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण बुखार है तो डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं लेने की सलाह देते हैं। अगर बुखार जुकाम के कारण है तो जुकाम की दवाएं ही काम आ जाती हैं। बुखार तेज होने पर माथे पर पानी की पट्टी रखने से आराम आ जाता है। यदि आपको समझ नहीं आ रहा और बुखार नियंत्रण में नहीं है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें या अस्पताल ले जाएं। शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना भी रोगों को निमंत्रण देता है। सामान्य बुखार में प्राकृतिक व घरेलू नुस्खे भी काम आ जाते हैं। एंटीऑक्सीडेंट तत्वों से युक्त देसी नुस्खे कुछ हद तक कामयाब भी हो जाते हैं।

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  • Question asked by Anil Upadhyaya
     
     
    Answered by Gourav Gupta
    • Gourav Gupta

      July 9, 2013 View All Answers (2)
    • A. आंखों का कैंसर, कैंसर रोग का एक प्रकार है। वयस्कों में आंख का मेलेनोमा सामान्य तौर पर पाये जाने वाला कैंसर है। हालांकी आंख का कैंसर रोग बच्चों में रेटिनोब्लासटोमा नाम की बीमारी के रूप में हो सकता है। आंखों का कैंसर आंख में असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि के कारण होता है। इसके लक्षणों के तौर पर आंख की पुतली का सफेद हो जाना (ल्यूकोकोरिया), आंखों का टेड़ा हो जाना (बहंगापन), मोतियाबिंद के विकास के कारण आंखों में दर्द का होना (बहुत कम मामलों में) आदि दिखाई देते हैं।

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  • Question asked by navneet singh
     
     
    Answered by teena
    • teena

      June 28, 2013 View All Answers (2)
    • A.

      डेंगू के खतरें से बचने के लिए घर में या घर के बाहर पानी इकट्ठा ना होने दें। डेंगू पैदा करने वाले मच्छर इकट्ठे पानी में अपना घर बनाते हैं। घर में हर सामान को ढक कर रखें इस प्रक्रिया के अन्तर्गत आप घर के सामान को ढक कर रखें चाहे वह खाने का बर्तन हो या पानी का। बीमारी फ़ैलाने वाले मच्छर खुली चीजों को निशाना बनाते है, खुला खाने का सामान इनमे से एक है।
      बीमारी से बचने के लिए आत्म-रक्षा करें। रात को मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी या मच्छर भगाने वाले स्प्रे का प्रयोग करें।

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  • Question asked by babita
     
     
    Answered by pankaj
    • pankaj

      June 19, 2013 View All Answers (2)
    • A. टाइफाइड पैदा करने वाले साल्मोनेला बैक्टीरिया को एंटीबॉयोटिक दवाओं से खत्म किया जाता है। हालांकि कुछ मामलों में लबे समय तक एंटीबॉयटिक दवाओं के इस्तेमाल से टाइफाइड के जीवाणु एंटीबॉयोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी (रेजिस्टेंट) हो जाते हैं। इस स्थिति से बचने के लिए योग्य डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही चिकित्सा कराएं। टाइफाइड की स्थिति में रोगी के शरीर में पानी की कमी न होने पाए, इसके लिए पीड़ित व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में पानी और पोषक तरल पदार्थ लेना चाहिए।

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  • Question asked by Sundar Lal
     
     
    Answered by Shikha
    • Shikha

      June 17, 2013 View All Answers (2)
    • A. आपका सवाल बड़ा ही वाजिब है जनाब। दरअसल जब हमारे शरीर पर कोई बैक्टीरिया या वायरस हमला करता है तो शरीर खुद ही उसे मारने की कोशिश करता है। इसी मकसद से शरीर जब अपना तापमान (सामान्य 98.3 डिग्री फॉरनहाइट से ज्यादा) बढ़ाता है तो उसे बुखार कहा जाता है। हालांकि कई बार बुखार थकान या मौसम बदलने आदि की वजह से होता है। ऐसे में 100 डिग्री तक बुखार में किसी दवा आदि की जरूरत नहीं होती। लेकिन बुखार इसी रेंज में 4-5 या ज्यादा दिन तक लगातार बना रहे या ज्यादा हो जाए तो इलाज की जरूरत होती है। कई बार बुखार 104-105 डिग्री फॉरनहाइट तक भी पहुंच जाता है। ऐसे में साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखें। मरीज को वायरल है, तो उससे थोड़ी दूरी बनाए रखें और उसके द्वारा इस्तेमाल की गई चीजें इस्तेमाल न करें।

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  • Question asked by rakesh kumar
     
     
    Answered by Onlymyhealth Team
    • Onlymyhealth Team

      May 22, 2013 View All Answers (1)
    • A. थकान से बचने के लिए दिन की शुरुआत व्यायाम के साथ करें। नियमित रुप से योगा व मेडिटेशन आपको अंदर से मजबूत व फिट रखेगा। इससे शरीर में चुस्ती-फुर्ती भी बरकरार रहेगी। बहुत ज्यादा तनाव और चिंता से दूर रहें क्योंकि चिंता-तनाव कई बीमारियों की जड़ है। अच्छी सेहत के लिए समय पर उठना और सोना भी जरूरी है। प्रतिदिन की दिनचर्या संतुलित होनी चाहिए। नींद पूरी न होने से भी कई बीमारियां और सुस्ती घेरे रहती है। फिटनेस के लिए ज़रूरी है कि आपका भोजन संतुलित हो। यानी भोजन में हरी सब्जियां और पौष्टिक तत्वों को शामिल किया जाए। अगर इन सबके बाद भी आप अच्छा महसूस नहीं कर रहें हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपंर्क करें।

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  • Question asked by ranjana
     
     
    Answered by Onlymyhealth Team
    • Onlymyhealth Team

      April 30, 2013 View All Answers (1)
    • A. बुखार होने पर आपको अपनी डाइट का ख्‍याल रखना चाहिये क्योंकि इस दौरान आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है जिसको घरेलू उपचार और खान-पान से ठीक किया जा सकता है। हर्बल चाय चाय में कुछ पत्‍तियां तुलसी और कुची अदरक तथा काली मिर्च मिला दें। इसको पीने से आपको काफी राहत मिलेगी।सिट्रस फ्रूट जैसे, नींबू, स्‍ट्रॉबेरी, अनानास आदि फलों में विटामिन सी होता है जो बुखार व सर्दी जुकाम में फायदेमंद होता है। बुखार में तरल पदार्थ लेना बहुत जरुरी है क्योंकि इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती है। पैकेट वाले जूस पीने की बजाए घर पर भी ताजा फलों का रस पीजिये और हर्बल और लेमन टी पी‍जिये।

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