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हृदय स्‍वास्‍थ्‍य QNA

हृदय स्‍वास्‍थ्‍य

दिल के मरीजों की संख्‍या बढ़ रही है, इसके लिए सबसे अधिक जिम्‍मेदार हमारी अनियमित जीवनशैली है। दिल को कैसे स्‍वस्‍थ रखें, दिल की बीमारियां क्‍या हैं, दिल की बीमारियों के लक्षण क्‍या हैं, हाइपरटेंशन क्‍यों होता है, हाइपरटेंशन का उपचार क्‍या है, दिल की समस्‍याओं का उपचार क्‍या है, आदि सवालों के जवाब यहां पायें। आप अपने सवाल भी यहां पूछ सकते हैं।

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Health and lifestyle Related Question on हृदय स्‍वास्‍थ्‍य

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  • Question asked by Kaushal kumar
     
     
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      March 19, 2018 View All Answers (1)
    • A. नमस्कार प्रश्न पूछने के लिए धन्यवाद। खाना खाने के बाद दिल की धड़कन का थोड़ा बहुत बढ़ना सामान्य है। इसे सामान्य रखने के लिए खाने को आराम आराम से चबा-चबाकर खाएं और खाने के बीच में या खाने के तुरंत बाद पानी न पिएं। इससे खाना ठीक से पचेगा और डकार नहीं आएगी। अगर फिर भी धड़कन बढ़ जाती है तो चिकित्सक को दिखाकर सलाह लें।

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  • Question asked by Shilpi
     
     
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      March 19, 2018 View All Answers (1)
    • A. नमस्कार प्रश्न पूछने के लिए धन्यवाद। अगर सिर में अक्सर दर्द की शिकायत रहती है तो एक बार किसी चिकित्सक को दिखाकर सी.टी. स्कैन करवा लें ताकि आपको इसके सही कारण का पता चल सके। कई बार लगातार सिर दर्द किसी रोग का शुरुआती संकेत होता है और आप समझ नहीं पाते हैं। अगर ये सामान्य है तो प्रोटीनयुक्त आहार लें और भरपूर नींद लें। रोजाना एक ही समय पर सोने की आदत बनाएं।

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  • Question asked by Danveer Vishwakarma
     
     
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      March 18, 2018 View All Answers (1)
    • A. सिर में भारीपन और दर्द और भारीपन अगर अक्सर बना रहता है या लंबे समय से ये समस्या है तो एक बार जांच करवा लें। इसके अलावा सिर दर्द ठीक करने के लिये अपने अंगुठे और तर्जनी के बीच की जगह पर हल्के से मसाज करें। इस प्रक्रिया को दोनों हथेलियों पर दोहरायें। उंगलियों के बीच के जगह को गोलाकार दिशी में हल्के से दबाव डालते हुए मसाज करें। इस तकनीक से आप एक मिनट में अपने सिरदर्द से राहत पा सकेंगे।

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  • Question asked by Avinash jain
     
     
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      March 12, 2018 View All Answers (1)
    • A. सवाल पूछने के लिए धन्‍यवाद, अविनाश आप की समस्‍या स्‍पष्‍ट नहीं है। कृपया आप दोबारा और स्‍पष्‍ट सवाल करें।

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  • Question asked by chunnu bahadur
     
     
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      March 12, 2018 View All Answers (1)
    • A. सवाल पूछने के लिए धन्‍यवाद, आपको किस प्रकार की दिक्‍कत हो रही है, इसे स्‍पष्‍ट कीजिए। अगर आपको किसी तरह की समस्‍या है तो आप डॉक्‍टर की सलाह ले सकते हैं।

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      September 28, 2017 View All Answers (1)
    • A. अत्‍यधिक हाई कोलेस्‍ट्राल व हाई ब्‍लड प्रेशर आपके दिल व रक्‍त धमनियों को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि इसका पता किसी डॉक्‍टर के पास हेल्‍थ चेकअप के लिए जाए बिना नहीं चलता है। आइए जानें हेल्‍थ स्‍क्रीनिंग कब व कितनी जरूरी है। ब्‍लड टेस्‍ट: नियमित ब्‍लड टेस्‍ट की शुरुआत बचपन में ही हो जानी चाहिए। वयस्‍कों को प्रत्‍येक दो वर्ष में कम से कम एक बार जरूर अपने ब्‍लड प्रेशर की जांच करवानी चाहिए। कई बार आपको इससे अधिक बार ब्‍लड प्रेशर की जांच की जरूरत हो सकती है। कोलेस्‍ट्राल लेवल: वयस्‍कों को 20 वर्ष की उम्र के बाद प्रत्‍येक 5 वर्ष में कम से कम एक बार अपने कोलेस्‍ट्राल लेवल की जांच जरूर करवानी चाहिए। अगर किसी के परिवार में ह्रदय रोगों का इतिहास है तो बच्‍चों के कोलेस्‍ट्राल लेवल की जांच जरूरी हो सकती है। डायबिटीज स्‍क्रीनिंग: डायबिटीज भी ह्रदय रोगों से जुड़े जोखिमों से एक है। ऐसे में डायबिटीज की नियमित जांच करवाते रहना महत्‍वपूर्ण है।

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      September 28, 2017 View All Answers (1)
    • A. ह्रदय रोग होने पर लोग अकसर तनाव व अवसाद का शिकार हो जाते हैं। प्रयास से न सिर्फ तनाव व अवसाद पर काबू पाया जा सकता बल्‍कि इनसे बचा भी जा सकता है। अवसाद से पीड़ित होने पर आपको थकान, लाचारी, और नाउम्मीदी का अहसास हो सकता है। इन हालातों में आपको खुद की मदद करना अत्यंत मुश्किल सा लग सकता है। लेकिन यह जानना बेहद ज़रूरी है कि ये सारी मनोदशाएं अवसाद का हिस्सा हैं और ये सही स्थिति को ठीक ढंग से नहीं दर्शाते हैं। जैसे-जैसे आप अपने अवसाद को पहचानने लग जाएंगे और उपचार की शुरूआत कर देंगे, तब नकारात्मक विचार गायब होते चले जाएंगे। आइये जानते हैं कि किस प्रकार से आप खुद अपने अवसाद को कम करने में अपनी मदद कर सकते हैं। खुद को दिनभर हल्के फुल्के कार्यों में या व्यायाम में व्यस्त रखें। ऐसे कार्य करें, जिसमें आपका मनोरंजन हो और आपको खुशी मिले जैसे कि फिल्म देखना, बॉल गेम खेलना। अपनी रूचि के अनुसार सामाजिक, धार्मिक या अन्य कार्यकमों में हिस्सा लें। अवसाद का एक कारण सही वक्त पर लक्ष्य पूरे न होना भी होता है। इससे बचने के लिए यथार्थवादी लक्ष्य निर्धारित करें। बड़े बड़े कार्यों को छोटे छोटे हिस्सों में बांटे, कुछ काम की प्राथमिकताएं निर्धारित करें और ऐसा कार्य करें, जिसे संपन्न करने की आपमें पूर्ण क्षमता हो। अन्य लोगों के साथ समय बिताएं और किसी भरोसेमंद मित्र या रिश्तेदार के साथ अपनी गुप्त बातों को बताएं। अपने आपको सबसे अलग थलग करने की कोशिश न करें और दूसरों को आपकी मदद करने दें।धैर्य रखें इस बात की उम्मीद रखें कि आपकी मनोदशा धीरे धीरे सुधरेगी। शीघ्रता से सुधरने की आशा न रखें। अपने अवसाद से एक झटके में बाहर आने के चमत्कार की अपेक्षा न करें। अक्सर ऐसा पाया जाता है कि इलाज के दौरान मनोदशा में खास बदलाव आने से पहले मरीज की नींद और भोजन करने की इच्छा में सुधार आता है। अवसाद की स्थिति में अक्सर लोग महत्वपूर्ण निर्णयों में गलती कर देते हैं। पहले अवसाद से बाहर निकलें। अपने निर्णयों को अपने उन शुभचिंतकों के साथ बाटें, जो आपको भलीभांति जानते हों और आपकी स्थिति का सही आकलन करें। इस बात को हमेशा ध्यान में रखें कि इलाज के दौरान जैसे जैसे आपकी स्थिति में सुधार होने लगेगा, वैसे वैसे आपके मन में नकारात्मक विचारों के स्थान पर सकारात्मक विचार आने लगेंगे। तनाव से ह्रदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। अगर किसी को पहले से दिल की बीमारी है तो तनाव उसे गंभीर बना सकता है। अतः तनाव से बचना चाहिए। यहां हम तनाव से बचने के कुछ उपाय बता रहे हैं। नियमित रूप योग, व्यायाम या मेडीटेशन करते रहने से आप तनाव से बचे रहेंगे। स्ट्रेस से बचना है तो आपको पर्याप्त नींद लेनी होगी। अपर्याप्त नींद तनाव के साथ साथ ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर बढाती है एवं कई रोगों को भी जन्म देती है। पानी पीने से तनाव बहुत कम होता है अतः जब भी आप तनाव में हों, पानी पीयें। भरपूर पानी पीते रहने से तनाव आपसे दूर ही रहता है।

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      September 28, 2017 View All Answers (1)
    • A. अगर आपको हृदय रोग है, हो सकता है कि आपको डर लगे कि सेक्‍स के दौरान आपको सीने में दर्द हो सकता है। या फिर आपको यह भी लग सकता है कि आपके भीतर सेक्‍स के लिए पर्याप्‍त ऊर्जा नहीं होगी। आपको यह भी चिंता सता सकती है कि शायद सेक्‍स से आपको दिल का दौरा पड़ जाए। लेकिन, क्‍या यही हकीकत है। दरअसल, अधिकतर हृदय रोगियों के लिए सेक्‍स पूरी तरह से सुरक्षित है। उन्हें सेक्‍स संबंधी हार्ट अटैक होने का खतरा सामान्‍य लोगों जितना ही होता है। इसलिए इस बारे में उन्‍हें अधिक घबराने की जरूरत नहीं है। दिल के कुछ मरीजों को कुछ समय के लिए सेक्‍स से बचना चाहिये। अगर आपको गंभीर हृदय रोग है। और शारीरिक काम करते समय आपको सीने में दर्द होता है, तो आपके लिए तब तक सेक्‍स करना उचित नहीं है जब तक इलाज से आपके लक्षण स्थिर नहीं हो जाते। अगर आपने अभी हाल ही में दिल का ऑपरेशन हुआ है तो जब तक टांके भर न जाएं, तब तक आपको सेक्‍स नहीं करना चाहिये। आप अपने डॉक्‍टर से इस बारे में बात कर सकते हैं कि आखिर कब सेक्‍स करना आपके लिए ठीक रहेगा। अगर आपको डर या चिंता दूर करने के लिए किसी की मदद की जरूरत हो, तो आप इस बारे में भी किसी विशेषज्ञ से बात कर सकते हैं। जहां तक कार्यस्‍थल पर ह्रदय की सेहत का सवाल है तो इन बातों पर गौर करना जरूरी है- आप कार्यस्‍थल पर कौन सा काम करते हैं? क्‍या आप किसी उपरकण/मशीनरी का नियमित इस्‍तेमाल करते हैं? क्‍या आप किन्‍हीं केमिकल/गैसों/धूल/धुआं आदि के संपर्क में आते हैं? आपके कार्यस्‍थल पर वातावरण कैसा है? आप कितने घंटे काम करते हैं व क्‍या शिफ्ट में काम करते हैं? क्‍या आप अपना काम पसंद करते हैं? क्‍या आपको लगता है कि काम के किसी हिस्‍से के कारण आपका स्‍वास्‍थ्‍य प्रभावित हो रहा है? क्‍या आपके स्‍वास्‍थ्‍य की नियमित जांच होती है? कार्यस्‍थल पर अत्‍यधिक शोर व तनाव ह्रदय के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ऐसे में बीमारी कितनी गंभीर है व चिकित्‍सकीय सलाह के आधार पर कामकाज संबंधी निर्णय लिया जाना चाहिए। कई बार ह्रदय रोग के चलते लोग डर, अवसाद व तनाव का शिकार हो जाते हैं। जिसका असर उनके पारिवारिक संबंधों पर नजर आने लगता है। ऐसी स्‍थिति में जीवन शैली में आवश्‍यक बदलाव कर इन पर काबू पाया जा सकता व सामान्‍य जीवन जिया जा सकता है।

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      September 28, 2017 View All Answers (1)
    • A. हार्ट मरीजों को हमेशा यह उलझन रहती है कि वे किस प्रकार का भोजन करें। सबसे पहले परहेज किया जाता है तेल व घी पर। चूंकि शरीर को वसा की हमेशा जरूरत रहती है, इसलिए इसे पूरी तरह भोजन से हटाया नहीं जा सकता। लेकिन खान-पान और जीवनशैली में हमेशा सकारात्मक परिवर्तन किए जा सकते हैं। खाद्य-पदार्थों से ही कोलेस्‍ट्रॉल और ब्‍लड प्रेशर का स्‍तर नियंत्रित होता है। कैलोरी, वसा, कोलेस्‍ट्रॉल, सोडियम आदि की मात्रा को निधार्रित करके दिल की बीमारियें को कम किया जा सकता है। दिल के मरीज इस तरह से अपना डाइट चार्ट बना सकते हैं। हार्ट पेशेंट के लिए डाइट चार्ट - सुबह सात बजे - मलाई रहित दूध एक गिलास दो चम्मच शक्कर के साथ, साथ में 3-4 बादाम भी लीजिए। सुबह नौ बजे- अंकुरित अनाज एक प्लेट मिक्स या वेजीटेबल उपमा। दोपहर 12 बजे- दो चपाती चोकर सहित, छिलके वाली दाल एक कटोरी, आधा कटोरी चावल, एक कटोरी हरी सब्‍जी, दही एक कटोरी, सलाद। तीन या चार बजे- चाय एक कप, भेल एक प्लेट या दो बिस्किट, फल एक (सेव, संतरा, कच्चा जाम, अनार, नाशपती आदि)। सात या आठ बजे- दिन में लंच के समय जैसा खाना खाया है ठीक वैसा ही रात के खाने में भी लीजिए। नौ बजे- फल एक या दूध आधा गिलास। इसके अलावा हार्ट के मरीज यह भी ध्‍यान में रखें - दिनभर में दो-तीन चम्मच घी व चार-पांच चम्मच तेल का उपयोग भोजन में करना चाहिए। हृदय रोगी को नमक, मिर्च तथा तले-भुने भोजन का प्रयोग कम से कम करना चाहिए या हो सके तो नहीं करना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियों एवं फल का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए। धूम्रपान, शराब या अन्य किसी नशीली वस्तु का सेवन बंद कर देना चाहिए। घी, मक्खन इत्यादि का सेवन कम से कम करना चाहिए। आंवला या लहसुन का सेवन प्रतिदिन करना चाहिए। सेब के मुरब्बे का सेवन हृदय रोगियों को विशेषकर करना चाहिए। हल्के-फुल्के व्यायाम तथा सुबह की सैर को अपनी दिनचर्या में अवश्य शामिल करना चाहिए। दिल के मरीजों के लिए दूध, जौ, बादाम, टमाटर, चैरी, मछली, बीटा ग्लूकोज बहुत फायदेमंद है। ऐसी डाइट कोलेस्ट्रॉल को घटाने में मदद करती है। इस तरह का खानपान 40 से ज्यादा उम्र वाले दिल के रोगियों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। इसके अलावा नियमित व्‍यायाम भी जरूरी है।

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      September 28, 2017 View All Answers (1)
    • A. हृदय को स्वस्थ रखने के लिए हमें अपने रोजमर्रा के जीवन में ही थोड़े बदलाव लाने की जरुरत होती है। अपने खानपान व जीवनशैली की आदतों में कुछ नई बातों को शामिल करने और कुछ खराब आदतों को निकाल देने से हमारे हृदय को फायदा होता है। आइये जानते हैं कि एक स्वस्थ्य हृदय के लिए क्या किया जाना चाहिए। तनाव आजकल की जीवनशैली का हिस्सा बन गया है। दफ्तर हो या परिवार, इंसान किसी न किसी वजह से तनाव में घिरा रहता है। लेकिन, तनाव आपके हृदय के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं। इसलिए तनाव मुक्त रहने की कोशिश करें। इससे आपको हृदय रोग को रोकने में मदद मिलेगी, क्योंकि तनाव हृदय की बीमारियों की मुख्य वजह है। अपने कोलेस्ट्रॉल लेवल को 130 एमजी/ डीएल तक बनाए रखें। कोलेस्ट्रॉल के मुख्य स्रोत जीव उत्पाद हैं, इनसे जितना अधिक हो, बचने की कोशिश करनी चाहिए। अगर आपके यकृत यानी लीवर में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल का निर्माण हो रहा हो तब आपको कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवाओं का सेवन करना पड़ सकता है। अपने ब्लड प्रेशर को 120/80 एमएमएचजी के आसपास रखें। ब्लड प्रेशर विशेष रूप से 130/ 90 से ऊपर आपके ब्लॉकेज (अवरोध) को दुगनी रफ्तार से बढ़ाएगा। इसको कम करने के लिए खाने में नमक का कम इस्तेमाल करें और जरुरत पड़े तो हल्की दवाएं लेकर भी ब्लड प्रेशर को कम किया जा सकता है। हृदय को स्वस्थ बनाने के लिए जरूरी है कि शरीर के वजन को सामान्य रखें। आपका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 से नीचे रहना चाहिए। तेल के परहेज और निम्न रेशे वाले अनाजों तथा उच्च किस्म के सलादों के सेवन द्वारा आप अपने वजन को नियंत्रित कर सकते हैं। रोज आधे घंटे तक जरूर टहलें। टहलने की रफ्तार इतनी होनी चाहिए कि जिससे सीने में दर्द न हो और आप हांफने भी न लगें। यह आपके अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में आपकी मदद कर सकता है। रोज 15 मिनट तक ध्यान और हल्के योग व्यायाम रोज करें। यह आपके तनाव तथा रक्त दबाव को कम करेगा। आपको सक्रिय रखेगा और आपके हृदय रोग को नियंत्रित करने में मददगार होगा। स्वस्थ हृदय के लिए रेशेदार भोजन का सेवन करें। भोजन में अधिक सलाद, सब्जियों तथा फलों का प्रयोग करें। ये आपके भोजन में रेशे और एंटी ऑक्सीडेंट्स के स्रोत हैं और एचडीएल या गुड कोलेस्ट्रोल को बढ़ाने में सहायक होते हैं। इससे आपकी पाचन क्षमता भी अच्छी बनी रहती है। अगर आप डायबिटीज से पीड़ित हैं तो शुगर को नियंत्रण में रखें। आपका फास्टिंग ब्लड शुगर 100 एमजी/डीएल से नीचे होना चाहिए और खाने के दो घंटे बाद उसे 140 एमजी/डीएल से नीचे होना चाहिए। व्यायाम, वजन में कमी, भोजन में अधिक रेशा लेकर तथा मीठे भोज्य पदार्थों से बचते हुए डायबिटीज को खतरनाक न बनने दें। अगर जरूरत पड़े तो हल्की दवाओं का सेवन करना चाहिए।

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      September 28, 2017 View All Answers (1)
    • A. यदि समय का ध्यान रखा जाए, और सही जानकारी हो तो हार्ट अटैक के मरीजों की जिंदगी बचाना आसान हो जाता है। हार्ट अटैक आने पर 90 मिनट के भीतर यदि थ्रंबोलाइसिस तकनीक की मदद से दवाएं देकर हार्ट की नलियों की रुकावट को खोल दिया जाए, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। हार्ट अटैक आने के बाद के 90 मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और इस दौरान किया गया उपचार ही मरीज को जीवन दे सकता है। वहीं परकुटेनिय ट्रांसलिमिनल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (पीटीसीए) की मदद से कुछ ऐसे उम्रदराज मरीजों की भी जान बचाई जा सकती है, जिन्हें लो ब्लडप्रेशर की दिक्कत होती है। लेकिन इस तकनीक में भी समय का उतना ही महत्व होता है। ऐसे मामलों में अटैक आने से ट्रीटमेंट शुरू तक ज्यादा से ज्यादा 90 मिनट का अंतर ही होना चाहिए। इसीलिये हार्टअटैक में यह समय गोल्डन टाइम कहा जाता है। अटैक आने के तुरंत बाद जीभ के नीचे एस्पिरिन की एक गोली रखने से भी जोखिम काफी कम हो सकता है। इसके साथ-साथ समय के साथ हार्ट अटैक के लक्षणों में आ रहे अंतर को समझना भी बेहद जरूरी होता है। उदाहरण के लिये सामान्य लोगों से उलट ज्यादातर डायबिटिक लोगों में हार्ट अटैक आने पर सीने में दर्द होने के बजाय सांस फूलने, घबराहट, छाती में भारीपन, चक्कर आना तथा जबड़े में जकड़न जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ध्यान रखें कि रोगी नहीं बता सकता कि उसे ये तकलीफ होने वाली है। तकलीफ हो जाने पर ही उसे पता चलता है, उसकी छाती में असहनीय पीड़ा होती है और उसकी नाड़ी की गति धीमी व कमजोर हो जाती है। चेहरे का रंग पीला पड़ जाता है, सांस फूलने लगती है व ठंडे पसीने आते हैं। वह निढाल और बेबस सा हो जाता है। तो यदि रोगी को ये लक्षण हों तो शोर न करें बल्कि सचेत व सजग बने रहें। डाक्टर को शीघ्र बुलाएं या रोगी को सबसे पास के अस्पताल ले जाएं। ध्यान रहे इस दौरान जो करें संयमित होकर करें। रोगी के बटन खोलें और कपड़े ढीले कर दें। यदि उसकी रीढ़ की हड्डी या छाती में तेज दर्द हो रहा हो तो गर्म या ठंडे पानी का स्पंज करें। गर्म पानी में भिगोकर और फिर निचोड़ कर पट्टी को हृदय के आस पास की जगह पर रखें। जब तक रोगी की धड़कन सामान्य न हो जाए या आप डाक्टर के पास न पहुंच जाए, रोगी का उपचार जारी रखें। रोगी के आस-पास शांति बनाए रखें। तेज रोशनी और शोर शराबा न करें और बार-बार पट्टी उठा कर त्वचा को साफ करते रहें। हो सके तो रास्ते में डॉक्टर से फोन पर संपर्क बनाएं और उसके अनुदेशों को पालन करें।

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      September 28, 2017 View All Answers (1)
    • A. आज के समय में दिल की बीमारियां कोई बड़ी बात नहीं, यह किसी को भी हो सकती हैं।दिल की बीमारियों से बचने के लिए ज़रूरी है आपका अपने स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति जागरूक होना। कई बार लोग ह़दयाघात तक की स्‍थिति को समझ नहीं पाते और ऐसी समस्‍या जानलेवा तक साबित होती है। हृदयरोगों से जुड़े ऐसे कई भ्रम हैं, जो पूरी तरह बेबुनियाद होने के बावजूद अधिकांश लोगों के दिमाग में घर किए रहते हैं। । कुछ मिथक तो बहुत आम होते हैं लेकिन इन्हें तोड़कर मरीज को सही उपचार देकर लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है। भ्रम : स्ट्रोक को हार्ट अटैक कहा जा सकता है? दिल का दौरा सीने में दर्द के साथ पड़ता है? तथ्य: स्ट्रोक के होने का खतरा तब होता है जब ब्लड प्रेशर के कम होने की वजह से दिमाग तक रक्त नहीं पहुंच पाता और हृदय की मांस पेशियों में ठीक प्रकार से रक्त का प्रवाह के नहीं होता, जिससे हृदय का दौरा पड जाता है। यह दोनों स्थितियां ही एक दूसरे से अलग अलग हैं।यह सच है कि हृदय का दौरा सीने में दर्द के साथ पड़ता है, लेकिन यह ज़रूरी नहीं है कि दिल के दौरे का मुख्य लक्षण सीने में दर्द हो। दिल के दौरे के समय दर्द हो भी सकता है और नहीं भी। भ्रम : हृदय के दौरे का अनुभव पुरुषों और महिलाओं में अलग-अलग तरीके से होता है?हृदय के दौरे के लक्षण पुरुषों और महिलाओं में एक ही तरीके से होते हैं? तथ्य: यह सच है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इस बीमारी का असर बाद में होता है लेकिन यह कहना पूर्णतया गलत होगा कि महिला दिल के दौरे से प्रभावित नहीं होतीं। हां यह सच है, लेकिन हृदय के दौरे के लक्षण पुरुषों और महिलाओं में अलग अलग हो सकते हैं। यह महिलाओं में भी वैसा नहीं होता जैसा कि फिल्मों में दिखाया जाता है। सामान्यत: व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी, पेट में दबाव, गले में सख्ती जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है। भ्रम : हृदय से जुड़ी बीमारियों से बचने के लिए विटामिन लेना ही बहुत है? स्वस्थ हृदय के लिए सिर्फ फैट युक्त आहार ना लेना ही बहुत है? तथ्य: हृदय के रोगियों को इस प्रकार के फल और सब्जि़ खाने की सलाह दी जाती है जिनमें कि विटामिन बी हो जैसे पालक और ब्रोकोली। रंगीन सलाद भी खाना भी एक अच्छा उपाय है लेकिन विटामिन ही लेना ऐसी बीमारियों का समाधान नहीं है। स्वस्थ हृदय के लिए ट्रांस फैट से बचना चाहिए क्योंकि कुछ फैट ऐसे भी होते हैं जो हमारे लिए अच्छे होते हैं जैसे कि मछलियों, नट और ऐवोकैडो में पाया जाने वाला फैट। ट्रांस फैटी पदार्थ जैसे कुकीज़ और चिप्स से बचना चाहिए। भ्रम: अगर आपको हृदय से सम्बन्धी कोई बीमारी है तो आप हृदय के मरीज़ हो सकते हैं?गुस्से से हृदय का दौरा पड़ सकता है? तथ्य: कम नमक खाने से आपकी सेहत को नुकसान पहुंच सकता है इसलिए हर व्यक्ति की सेहत के लिए कम नमक खाना ठीक नहीं होता। गुस्सा करने वाले लोगों को ए टाइप की पर्सनालिटी माना जाता है, जो कि हृदय को बिलकुल भी नुकसान नहीं पहुंचाता। लेकिन भावनाओं को अनदेखा करने से दिल के दौरे का बढ़ जाता है। भ्रम: हृदय के दौरे से बचने का कोई उपाय नहीं है? तथ्य: हृदय के दौरे से बचने का कोई सीधा उपाय नहीं है। हमें सिर्फ बीमारियों से बचने के लिए एक स्वस्थ्य जीवनशैली का निर्वाह करना। साल में एक बार डाक्टर के पास जाकर अपने ब्लड प्रेशर और ब्लड कालेस्ट्राल का स्तर ज़रूर चेक करायें। हृदयाघात होने के बाद भी व्‍यक्ति के लिए व्यायाम आवश्‍यक हो जाता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि आप बहुत अधिक व्यायाम करें। सही मात्रा में व्यायाम करने रक्त का संचार ठीक रहता है और हृदयपात जैसी स्थिति से भी बचाव हो सकता है।

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      September 28, 2017 View All Answers (1)
    • A. हृदय रोग के अंतर्गत हृदय वॉल्‍व सम्बन्धी बीमारियां, हृदय ताल और विशेषकर कोरोनरी धमनी की बीमारियां आदि रोग आते हैं। दुनिया भर के चिकित्‍सकों के लिए हृदय रोगों से निपटना अभी एक बड़ी चुनौती है। अपनी जीवनशैली में सकारात्‍मक बदलाव, खान-पान में सुधार आदि से इसके लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। नीचे दिए गये उपायों को अपनाकर आप हृदय रोगों के संभावित खतरों से काफी हब तक बच सकते हैं- अपने हृदय और हृदय प्रणाली को स्वस्थ रखने की दिशा में कुछ खास बदलाव करें। प्रतिदिन व्यायाम करें। ये तरीके हृदय को स्‍वस्‍थ रखते हैं और हृदय रोगों के खतरे को कम करने में मदद करते हैं। और साथ ही हृदय रोग होने की स्थिति में रोग को गंभीर होने से भी रोकते हैं। ये बदलाव करने से आपको कोई अन्य हृदय रोग होने से बचाव होगा और यदि रोग का उपचार चल रहा है तो उसमें जल्दी लाभ होने में भी सहायता होगी। एक स्वस्थ संतुलित आहार लें जिसमें सभी खाद्य समूहों से खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। वे भोजन जिनमें संतृप्त वसा, ट्रांस वसा और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है, वे शरीर के नुकसानदेह होते हैं। यदि आप हृदय रोगों और समस्याओं से दूर रखना चाहते हैं तो आपको एल्कोहोल का इस्तेमाल भी कम करना होगा। हृदय रोग से ग्रसित रोगी अकसर कुछ अन्य रोगों की निदान की प्रक्रियाओं जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल आदि से भी गुजर रहे होते हैं। इन सभी को नियमित जांच और नियंत्रण कर, आप ह्रदय रोगों के जोखिम कारकों से आसानी से मुकाबला कर पायेंगे। हृदय रोग के मरीजों को चाहिए कि वे अपना रक्त चाप 140/90 से कम रखें। इससे उन्हें हृदय रोग को काबू करने में मदद मिलती है। साथ ही वे रोगी जिन्हें हृदय रोग के साथ डाइबटीज है वे अपनी शुगर की नियमित जांच भी करें। कभी-कभी जीवन शैली में बदलाव हृदय रोगों के निदान के लिए काफी नहीं होता है। दवाएं हृदय रोग के लक्षणों के कई प्रकार के इलाज के लिए एक कारगर तरीका है। कुछ दवाएं रक्त को पतला करने तथा कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने का कार्य करती हैं। आपके लिए यह जानना आवश्यक है कि जो दवा आप ले रहे हैं वह आपके दिल की बीमारी के इलाज के लिए कैसे काम करती है। यह दवाएं नीयमित रूप से व ठीक मात्रा और समय पर ली जानी जरूरी होती हैं। अपने डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं का सेवन कतई बंद ना करें, ऐसा करने से आपका रोग और गंभीर हो सकता है। यदि दवाएं ठीक प्रभावी ढंग से हृदय रोग के लक्षणों को नियंत्रित नहीं करती हैं, तो शल्य चिकित्सा विकल्प के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें। कई प्रक्रियाओं, संकीर्ण या अवरुद्ध धमनियों को फिर से खोलने या सीधे हृदय की चिकित्सा के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं। हृदय की चिकित्सा के निम्न प्रकार हो सकते हैं। हार्ट वॉल्व सर्जरी, इनफ्रेक्ट एक्सक्लूजन सर्जरी हार्ट ट्रासप्लान्ट(ह्रदय प्रत्यारोपण) बाईपास सर्जरी हृदय के लिए अन्य भी कई सर्जरी होती हैं, जो पूरी तरह रोग की स्थिति और अवस्था पर निर्भर करता है।

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      September 28, 2017 View All Answers (1)
    • A. हृदय से संबंधित अनेक बीमारियां एवं परेशानी होती हैं जिसका हृदय पर गलत प्रभाव पड़ता है। इनमें कोरोनरी आर्टरी डिसीज, एंजाइना, दिल का दौरा आदि हैं। कोरोनरी आर्टरी डिजीज का सबसे आम लक्षण है एंजाइना या छाती में दर्द। एंजाइना को छाती में भारीपन, असामान्यता, दबाव, दर्द, जलन, ऐंठन या दर्द के अहसास के रूप में पहचाना जा सकता है। हार्ट अटैक के दौरान आमतौर पर लक्षण आधे घंटे तक या इससे ज्यादा समय तक रहते हैं और आराम करने या दवा खाने से आराम नहीं मिलता। लक्षणों की शुरुआत मामूली दर्द से होकर गंभीर दर्द तक पहुंच सकती है। ऐसी स्‍थिति में फौरन आपातकालीन मदद लें, क्योंकि हार्ट अटैक में फौरन इलाज बेहद जरूरी है। हार्ट वाल्व संबंधी बीमारी के लक्षण हमेशा स्थिति की गंभीरता से संबंधित नहीं होते। कई बार ऐसा भी होता है कि कोई लक्षण सामने नहीं आता। लक्षणों में पूरी सांस न आना, खासतौर से तब, जब आप अपनी सामान्य नियमित दिनचर्या कर रहे हों या बिस्तर पर सीधे लेटे हों। कमजोरी या बेहोशी महसूस होना। सीने में असहजता महसूस होना आदि। जन्‍मजात दोषों का जन्म के फौरन बाद या बचपन में भी पता लगाया जा सकता है। कई बार बड़े होने तक इसका पता नहीं लग पाता। इसके लक्षणों में तेज सांस लेना और भूख में कमी। वजन ठीक ढंग से न बढऩा। फेफड़ों में बार-बार इन्फेक्शन होना। एक्सरसाइज करने में दिक्कत आदि हैं।

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      September 28, 2017 View All Answers (1)
    • A. दिल बहुत नाजुक है, अगर स्‍वस्‍थ आदतों को न अपनाया जाये तो यह आसानी से बीमार पड़ सकता है। शरीर के अन्‍य बीमारियों की तरह दिल से संबंधित कुछ बीमारियां अचानक से आती हैं, इनको लेकर आप सजग नहीं होते और कभी-कभी ये जानलेवा भी हो सकती हैं। सबकुछ सही चल रहा है और आपकी दिनचर्या अस्‍वस्‍थ है इसका मतलब भी यह नहीं कि आपका दिल स्‍वस्‍थ है। दिल का दौरा पड़ना, दिल की धमनियों का मोटा हो जाना, दिल की धड़कन बंद हो जाना, अथेरोस्‍लेरोसिस जैसी दिल की बीमारियां छुपी होती हैं और अचानक से सामने आती हैं। यहां तीन प्रमुख बीमारियों को उजागर करने के तरीकों के बारे में जानिये। दिल का दौरा पड़ना दिल का दौरा अचानक से आता है और इस दौरे के बीच में खुद को बचाने के लिए आपके पास केवल 10 सेकेंड होते हैं, अगर इस बीच आप चूक गये तो गंभीर समस्‍या हो सकती है। ज्‍यादातर दिल के दौरे के लिए खानपान की गलत आदतें और गलत जीवनशैली जिम्मेदार है। अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में जंकफूड को एक अहम हिस्‍सा बना लिया है जो दिल के दौरे की संभावना को बढ़ाने में मदद करता है। खाने में वसा, नमक, अंडे और मांस का प्रयोग जो लोग अधिक करते हैं उन्‍हें सामान्‍य लोगों की तुलना में दिल का दौरा पड़ने की संभावना अधिक होती है। लेकिन दिल का दौरा पड़ने से पहले दिल में सामान्‍य दर्द शुरू होता है और यह दर्द धीरे-धीरे विकराल हो जाता है, इस स्थिति को बिलकुल भी नजरअंदाज न करें और चिकित्‍सक से संपर्क करें। बिना लक्षण के अथेरोस्‍लेरोसिस यह भी दिल की एक गंभीर समस्‍या है जिसके लक्षण बिलकुल भी दिखाई नहीं देते हैं। हमारी उम्र बढ़ने के साथ, शरीर के विभिन्न हिस्सों की रक वाहिकाओं में, जिनमें कोरोनरी आर्टरीज भी शामिल हैं, उनमें कोलेस्ट्रॉल जम जाता है एवं रक्त के बहाव में धीरे-धीरे बाधा उत्पन्न कर देता है। इस धीरे-धीरे संकरे होने की प्रक्रिया को अथेरोस्लेरोसिस कहते हैं। अगर रक्‍त संचार में बाधा के कारण बेचैनी और अन्रिदा की शिकायत हो तो चिकित्‍सक से संपर्क कीजिए और अपनी समस्‍या के बारे में बतायें। दिल का कमजोर होना आपको बिना बताये आपका दिल कमजोर हो जाता है। निम्‍न रक्‍तचाप के कारण दिल सबसे अधिक कमजोर होता है। इसके अलावा धमनियों का संकरा होना, रक्‍त संचार ठीक से न होना भी दिल को कमजोर बनाता है। जरा सा भी परिश्रम करने पर सांस फूलने लगे, पसीना आ जाए, सीढ़ियां चढ़ते समय दम भर जाए तो समझो आपका दिल कमजोर है। इस स्थिति को बिलकुल भी नजरअंदाज न करें और चिकित्‍सक से संपर्क कीजिए। अगर आपके घर में पहले भी किसी को यह समस्‍या हो गई है तो यह आपको भी हो सकती है, इसके अलावा दिल को स्‍वस्‍थ रखने के लिए समय-समय पर इलेक्ट्रोकार्डिओग्राम, ईसीजी, आदि करवाते रहें। समस्‍या होने पर चिक्त्सिक से सलाह अवश्‍य लें।

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  • Question asked by pintu
     
     
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      August 26, 2017 View All Answers (1)
    • A. सवाल पूछने के लिए धन्‍यवाद। छाती में दर्द हृदय संबंधी समस्याओं के अलावा कुछ और संभावित कारणों से भी हो सकता है। यह समस्या फेफड़ों में संक्रमण, इसोफैगस, मांसपेशियों, पसलियों या तंत्रिकाओं की किसी समस्या के कारण भी हो सकती है। गर्दन के निचले हिस्से से लेकर पेट के ऊपरी हिस्से तक कहीं भी छाती के दर्द को महसूस किया जा सकता है। फेफड़े की बीमारी होने की वजह से भी छाती में दर्द हो सकता है। ऐसे में छाती के बीच में दर्द होने के बजाए बगल में दर्द होता है। सांस लेने या खांसने से ये दर्द और बढ़ जाता है। बेहतर होगा आप किसी योग्‍य चिकित्‍सक से मिलकर सलाह लें जो समस्‍या का कारण समझकर उचित उपचार सुझा सकता है।

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  • Question asked by Madhu Kumari
     
     
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      August 26, 2017 View All Answers (1)
    • A. सवाल पूछने के लिए धन्‍यवाद। सीने में दर्द हमेशा हृदय संबंधी समस्‍याओं के कारण नहीं होता है। इसके लिए कई अन्‍य कारण हो सकते हैं। हालांकि, सीने में दर्द महसूस होने पर हमेशा चिकित्‍सक से सलाह लेने के लिए कहा जाता है ताकी सीने में दर्द के सही कारणों के बारे में जानकारी हासिल की जा सकें। एक बार यह जानने के बाद कि दर्द के कारणों में दिल संबंधी गंभीर समस्‍या शामिल नहीं है। आप सीने में दर्द के इलाज के लिए कुछ घरेलू उपचारों का सहारा ले सकते हैं। जब भी आप सीने में दर्द का अनुभव करें तो सूजन को कम करने और खांसी से राहत पाने के लिए अदरक की जड़ की चाय का सेवन करें। इसके अलावा इससे बनी चाय हार्टबर्न के कारण होने वाले सीने में दर्द को दूर करने में भी मददगार होती है। अनार के जूस के नियमित सेवन से इसमें मौजूद प्रभावी एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी-इफ्लेमेंटरी गुण सीने में दर्द को रोकने में मदद करता है। अन्‍य घरेलू उपायों के बारे में जानने के लिए यह लेख पढ़ें http://www.onlymyhealth.com/health-slideshow/best-home-remedies-to-relieve-chest-pain-in-hindi-1419398294.html

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  • Question asked by  Rajendra Ingle
     
     
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      August 9, 2017 View All Answers (3)
    • A. यदि ऐसा है तो आप घबराहट यानी एंग्‍जाइटी डिसऑर्डर के शिकार हैं। मन को शांत करने के ऐसे ही कुछ सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्‍प हैं। कैमोमाइल चाय में मौजूद एंटी-इफ्लेमेंटरी और शांत रहने वाले गुण घबराहट के इलाज में आपकी मदद करते हैं, साथ ही नर्व्‍स को शांत रखने में मदद करते हैं। कैमोमाइल की चाय बनाने के लिए एक कप पानी में सूखे कैमोमाइल के दो चम्‍मच मिलाकर अच्‍छे से उबाल लें। फिर इसमें शहद की एक चम्‍मच मिला लें। इस गर्म चाय को दिन में तीन बार लें। ओमेगा-3 फैटी एसिड एंग्जाइटी के लक्षणों को कम करने और शरीर में तनाव केमिकल के स्‍तर जैसे एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल को कम कर मूड को अच्‍छा करने में मदद करता है। फैटी फिश जैसे ट्यूना और सालमन, अखरोट और अलसी के बीज ओमेगा-3 फैटी एसिड का बहुत अच्‍छा स्रोत है।

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  • Question asked by meraj
  • Question asked by Shweta
     
     
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      May 12, 2017 View All Answers (1)
    • A. कंधे का दर्द काफी समय तक बना रहने पर रोगी को आमतौर पर कंधे के कुछ प्रकार के व्यायाम करने की सलाह दी जाती है। इसका उद्देश्य जितना संभव हो, कंधे को जकड़न से मुक्त करना और उसकी गतिशीलता बनाये रखना है। कुछ जटिल मामलों में जब इन सबसे फायदा नहीं होता है, तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह भी दे सकते हैं। हालांकि सर्जरी की सलाह केवल कुछ गंभीर मामलों में ही दी जाती है। आमतौर पर तो निम्न प्रभावी थेरेपी एक्सरसाइज की मदद से ही कंधे के दर्द का उपचार हो जाता है। http://www.onlymyhealth.com/health-slideshow/treat-shoulder-pain-in-hindi-with-these-physical-therapy-exercisesin-hindi-1423899114.html

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